History

आर्य, भारतीय या विदेशी

आर्य, भारतीय या विदेशी

पिछले 200 साल से ये प्रश्न भारत के जनमानस को और इतिहासकारों को लगातार उद्वेलित करता रहा है। वैसे अगर वामपंथी इतिहासकारों से पूछोगे तो वो एक स्वर में फैसला सुना देंगे कि आर्य विदेशी थे। मध्य एशिया या यूरोप के किसी स्थान से आर्य जति  भारत आई थी। रोमिला थापर, इरफ़ान हबीब या विपिन चंद्रा कुछ ऐसे ही इतिहासकार हैं। वैसे तर्क की कसौटी पर इनमे से कई दावे गलत साबित हुए, मगर मज़ाल है जो वामपंथी इतिहासकार अपना मत वापस ले लें।
इनके अनुसार आर्य गौर वर्ण के थे, लम्बा कद, चौड़ा माथा इनकी पहचान थी। मगर इस बात का कोई जवाब नहीं की फिर आज के 90% से ज्यादा भारतीय ऐसे क्यों नहीं, क्यों 90% से ज्यादा भारतीय लम्बे नहीं है, उनका चौड़ा माथा नहीं है। क्यों 90% से ज्यादा भारतीय गौर वर्ण के नहीं हैं, क्यों पूरा भारत सांवले वर्ण का है। अगर विदेशी आर्य ज्यादा थे, तो भारत के लोगों में घुल मिल जाने के बाद भी अधिकतर भारतियों को गौर वर्ण का होना चाहिए था। और अगर वो संख्या बल में कम थे तो भारत के मूल लोगों पर अपनी विदेशी संस्कृति कैसे थोप दी। 800 साल तलवार के दम पर भारत पर राज करने वाले मुस्लिम भी अपनी संस्कृति भारत पर नही थोप पाये। फिर आर्यों ने भारत की संस्कृति कैसे बदल दी। और फिर जहां से वो आये थे वहां भी तो उनकी संस्कृति कुछ बची होनी चाहिए थी। क्यों वेदों में आर्यों ने गंगा की,सरस्वती की या भारत भूमि की वंदना की। अपनी वास्तविक मातृभूमि की प्रसंशा क्यों नही की। क्यों विदेशी आर्यों ने इस भूमि को अपनी पुन्यभूमि मन लिया। जबकि 800 साल भारत में रहने वाले मुस्लिम आजतक इसे अपनी पुण्यभूमि नही मन पाए। क्यों आर्यों के सबसे बड़े महाकाव्य ग्रन्थ रामायण और महाभारत के मुख्य चरित्र गौर वर्ण के नही हैं। क्यों राम सांवले हैं, क्यों कृष्ण सांवले हैं? इतने सांवले कि नाम ही श्याम पड़ गया। इनका जवाब इन विद्वान वामपंथी इतिहासकारों के पास नहीं है। होगा भी कैसे, झूठ का क्या तर्क हो सकता है। एक षड्यंत्र के तहत इन इतिहासकारों ने भारत के आत्मगौरव पर आघात करने के लिए ये सब लिखा। लेकिन कुछ भी हो, एक दिन भारत के  राष्ट्रवादी लोग इन घटिया इतिहाकारों का मुहं काला कर इनको घर बैठे देंगे, और इनकी किताबों को फाड़ कर उनकी होली जला देंगे ताकि दोबारा कोई चीन  और पश्चिम  का चमचा इतिहासकार भारत के इतिहास को ऐसे कलंकित ना कर सके।
जब भारतमाता ने खुद वामपंथी इतिहासकारों की क्लास ली, देखिए ये वीडियो

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