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नोट बंदी, मोदी और विरोधी

नोट बंदी, मोदी और विरोधी

8 नवम्बर 2016 की वह मनहूस शाम राहुल गांधी और तमाम विरोधी नेता कभी नहीं भूलेंगे जब प्रधानमंत्री मोदी ने एक हजार व् पांच सौ के नोटों को बंद करने की घोषणा की। कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों को लगा कि मोदी ने खुद को हिटविकेट कर दिया है। बड़ी उम्मीद से अंपायर रूपी जनता से अपील की। अंपायर ने उत्तर प्रदेश के चुनाव में फैसला सुना दिया कि मोदी हिटविकेट आउट नहीं थे, बल्कि ये उनका विजयी स्ट्रोक था। राहुल भैया रोते रह गए, अखिलेश चिल्लाते रह गए और मायावती कपड़े फाड़ने लगी कि ये सब इ वी एम मशीन की कारस्तानी है। मगर किसी को समझ नहीं आया कि ये नोटबन्दी का कमाल था। राहुल भैया जब पांव जमीन पर नही होते ना तो अच्छे अच्छे की खाट खड़ी हो जाती है तो ये कांग्रेस के युवराज क्या चीज हैं। आश्चर्य है कि अभी तक विपक्षी दल अपनी दुर्दशा की असल वजह समझ नही पाए या समझना नही चाहते, जो भी हो। इतना तय है कि जितना ये दल मोदी के हर काम पर नाटक करेंगे,उतना ही मोदी के प्रति जनता का समर्थन बढ़ता जाएगा। मनमोहन सिंह जैसे अर्थशास्त्री का ये बयान कि नोटबन्दी से देश की विकास दर को दो से तीन फीसदी का नुकसान होगा, भी हवाई सिद्ध हुआ। सच तो है कि इस बयान से मनमोहन सिंह ने अपने साथ हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय की भी मिटटी पलीत कर दी। और देश की सरकारी स्कूल में पढ़ी जनता ने उन्हें बता दिया कि वो लोगों से कितना जुड़े हैं। म्नमोहन जी आप वही हैं न जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री काल में सिलेंडरों की संख्या आठ तय करते हुए कहा था कि एक परिवार को साल में आठ से ज्यादा सिलेंडर की जरूरत नही पड़ती। काश अगर आपको भारत के परिवारों की जरूरत की जानकारी होती तो आज कांग्रेस यहां न होती। आपको तो सिर्फ एक परिवार की जरूरत की जानकारी थी, आखिर उसने आपको प्रधानमंत्री जो बनाया था। और युवराज लिस्ट पेश कर रहे थे कि मोदी को किस औद्योगिक घराने ने कितने पैसे दिए। बस इसमें क्वोत्रेची का नाम लिखना भूल गए थे, पर जनता ने उन्हें याद दिला दिया। बड़ी शान से कहते थे कि असली काला धन तो विदेशी बैंकों में है, और मोदी उसे लाना नहीं चाहते, मगर यू पी की जनता ने पूछ लिया कि राहुल जी अगर आपको मालूम है कि काला धन कहाँ है तो दस जब आपकी सरकार थी तो आप क्यों नही लाये। नोटबन्दी का जबरदस्त विरोध लालू और ममता ने भी किया था। तो अब अगली बारी शायद इन्ही की है। चलो इंतजार करते हैं, 2019 अब ज्यादा दूर नहीं।

नोटबन्दी पर 2016 ने 2017 से क्या कहा, जानने के लिए देखिए ये वीडियो….

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