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राम मंदिर बोले तो साम्प्रदायिक, बाबरी मस्जिद बोले तो सेक्युलर..

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राम मंदिर बोले तो साम्प्रदायिक, बाबरी मस्जिद बोले तो सेक्युलर..

मित्रों, सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद राम मंदिर और अयोध्या एक बार फिर सुर्खियों में हैं। राम तुमने कभी सोचा भी ना होगा कि तुम्हारे जाने के बाद भारत में बहस होगी कि तुम कभी जन्मे थे या नहीं। अगर तुम्हे पता होता तो शायद तुम भी जाने से पहले एक ताजमहल बना जाते,जो तुम्हारे होने और जन्म लेने का प्रमाण तो होता। या कदाचित तुम किसी और का धर्मस्थान तोड़ कर मंदिर बना  जाते तो बाबर और ओरंगजेब की तरह तुमको रोमिला थापर और इरफ़ान हबीब जैसे घटिया वामपंथी इतिहासकार जगह तो देते। पर अफ़सोस उस समय कोई दूसरा संप्रदाय था ही नहीं जो तुम किसी दूसरे संप्रदाय का धर्मस्थान तोड़ते। सभी तो सनातनी थे। और वैसे भी किसी की आस्था को ठेस पहुँचाना ना तो तुम्हारे स्वभाव में था ना हिन्दू संस्कृति के।

काश तुम एक धर्म का पैगम्बर बन कर लोगों को ईश्वर का झूठा सच्चा पैगाम देकर दस बारह शादियां ही कर लेते तो लोग तुम्हे याद करते। मार्क्सवादी आस्था के नाम पर तुम्हारा साथ देते और विपिन चंद्रा जैसे इतिहासकार अपनी किताबों में तुम्हे जगह देते। पर अफ़सोस तुम तो एक पत्नीव्रता थे। या फिर तुम औरंगजेब की तरह अपने पिता को कैद करके राजतिलक कर लेते तो इरफ़ान हबीब जैसे इतिहासकार तुमहारी तारीफ करते । पर अफ़सोस तुम तो आज्ञाकारी पुत्र थे,पिता के वचन को रखने के लिए चौदह साल के लिए वन चले गए। या फिर तुम आदर्श राम राज्य की बजाय समाजवादी राज्य बनाकर स्टालिन और माओ की तरह अयोध्या में नरसंहार करते तो भी मार्क्सवादी इतिहासकार और मार्क्स के ये भारतीय चेले तुम्हारे नाम के कसीदे पढ़ते और स्वर्णाक्षरों में तुम्हारा नाम लिखते । पर अफ़सोस तुमने कुछ भी नहीं किया । सिर्फ सत्य और नैतिक मूल्यों का सम्मान किया। प्रजा का हित ही राजा का हित माना।

राम काश तुम एक धार्मिक किताब ही लिख गए होते जिसे ईश्वरीय पुस्तक बता कर लोगों को उलटी सीधी शिक्षा देकर उनका जीवन दुश्वार बना दिया जाता तो मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की सरकार सुप्रीम कोर्ट में तुम्हारे अस्तित्व के ना होने का एफेडेविट तो न देती। या तुम ये नियम बना जाते कि जो मूर्तिपूजा नहीं करता वो काफिर है तो आज भारत के हिन्दू काफिर का जवाब काफिर से तो दे देते । पर राम तुम तो सनातन काल से चली आ रही शांति और सदभावना की परंपरा का हिस्सा थे। और इसलिए तुमने कुछ भी ऐसा नहीं किया जो इतिहास तुम्हारा स्थान कहीं रखे।

पर राम तुमने जो किया उसके कारण आज भी सौ करोड़ लोग तुम्हे अपने दिल में रखे हुए हैं। सेकुलर जमात तुम्हे माने न माने भारत के करोड़ों हिन्दू सिख जैन बौद्ध तुम्हे मानते आये हैं और मानते रहेंगे। और एक दिन भारत में राष्ट्रगौरव का बोध सबको होगा और ये सेकुलरिज्म के नाम पर राष्ट्रद्रोह की घटिया राजनीती करने वाले ये घटिया राजनैतिक दल घर बैठ जायँगे और उस दिन ये घटिया प्रथा भी बंद हो जायेगी कि राम मंदिर बोलो तो सांप्रदायिक और बाबरी मस्जिद बोलो तो सेक्युलर…

क्या हुआ जब एक हिन्दू ने एक सेक्युलर को राम के जन्म का प्रमाण दिया। जानने के लिए ये वीडियो देखें,…..

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