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भारत में खेल संस्कृति को प्रभावित करने वाले पांच खिलाडी

भारत में खेल संस्कृति को प्रभावित करने वाले पांच खिलाडी

भारत खेलों की दुनिया में कभी एक ताकत नहीं रहा। मगर फिर भी समय समय पर कुछ ऐसे खिलाड़ी हुए जिन्होंने भारत में खेलों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। जिनके कारण भारत के खिलाड़ियों को भी आत्मविश्वास हुआ कि भारतीय भी खेलोंमे अच्छा कर सकते हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे पांच खिलाडियों की जिन्होंने भारत में खेलों को नई ऊंचाई दी।

तो सबसे पहले नाम आता है मेजर ध्यानचंद का। जिन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाता है। ध्यानचन्द के कारण भारत अगले 30 साल तक दुनिया में हॉकी का सिरमौर रहा। ध्यानचंद के जन्मदिन को खेल दिवस के रूप में भी मनाते हैं। दूसरे खिलाडी हैं, मिल्खा सिंह। मिल्खा सिंह 60 के दशक में भारत के स्टार एथलीट रहे। 1960 के रोम ओलम्पिक में मिल्खा 400 मीटर की दौड़ में चौथे स्थान पर रहे। सेकंड के दसवें भाग से वो कांस्य पदक से चूक गए। मगर एथलेटिक्स की कई पीढियां उनसे प्रेरित रही।

तीसरे खिलाडी हैं कपिल देव। वैसे तो उनसे पहले सुनील गावस्कर भारतीय क्रिकेट को बदल चुके थे। मगर 1983 का विश्व कप अगर भारत न जीतता तो आज भारतीय क्रिकेट यहां न होता। और उस विश्व कप को जीतने की सबसे बड़ी वजह कपिल थे। उन्होंने भारतियों को जीतने का विश्वास दिया। चौथे नम्बर पर हैं पी टी उषा। 1984 के लांस एंजल्स ओलम्पिक में 400 मीटर बाधा दौड़ में चौथे स्थान पर रही उषा ने 1986 के सियोल एशियाड में 4 स्वर्ण पदक जीत कर भारत की महिला खिलाडियों में कुछ कर सकने का आत्म विश्वास भरा। एथलेटिक्स की कई पीढ़ियां उनसे प्रभावित रही।

और पांचवे खिलाडी हें अभिनव बिंद्रा। 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाले वे अब तक के पहले भारतीय बने। उन्होंने भी भारत के खिलाड़ियों में ये विश्वास भरा कि वे भी स्वर्ण पदक जीत सकते हैं। उसके बाद से हर ओलम्पिक में भारत अपने खिलाडियों से पदक की उम्मीद करने लगा है। नही तो पहले भारतीय खिलाड़ी ओलम्पिक में घूमने जाते थे।
तो मित्रों ये थे भारत के वो पांच खिलाडी जिन्होंने अलग अलग दौर में भारत के खेल और खिलाड़ियों को प्रभावित किया।

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